विभा सिंह की कवितायें
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Friday, 3 February 2012
मन!!!!!
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मन से बड़ा न शत्रु कोई ,मन से बड़ा न मीत | मन जग अँधियारा करे , मन ही जलाये दीप || मन परिवर्तन शील है , मन के भेद अपार | मन को वश ...
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