विभा सिंह की कवितायें
Pages
(Move to ...)
Home
▼
Wednesday, 7 March 2012
होली!!!
›
दो अक्षर का नाम है होली रंगों का त्यौहार है होली टूटी दिल को जोड़े होली तार-२ झंकृत हो बोले हर दिल की बोली अरे मै तेरी होली की हाय मै ...
यांदे!!!
›
यांदे तो जीवन के पल-२ की कहानी है कोई कडवी दर्द भरी तो , कोई मीठी सुहानी है ।। बचपन की मीठी यादे , मानस में किलोले करती सखियों के मधुर...
1 comment:
अनुभव !!!!!!!!!!!!!!!
›
दुःख न आता तो ,सुख का अनुभव कहाँ होता । वियोग के बाद सयोंग का , आनंद कहाँ होता ।। हानी न होती तो लाभ का मूल्य कहाँ होता । अभाव की बाद उपल...
हम कौन है?
›
पूछते है दूसरों से उनका पता ठिकाना हमने खुद का पता न जाना दंभ की मैली चादर ओढ़ी छल -कपट का ताना बना कम क्रोध हुए संगी साथी ...
अध्यात्म !!!!!
›
दुर्गम पथ -तम में आजा ए मेरे चिर अविनाशी जैसे की सुने नभ में आती है पूरनमासी ।। निद्रित पलकों में करती प्रतिदिन तेरा आहवाहन फिर भी नि...
कर्म !!!!!
›
कर्म-पाश में बधे हुए हैं, प्राणी जग के सारे । विजय सभी से प्राप्त किया, और अपने से हारे ।। भव बंधन के संचालन को, ऐसा रचा विधाता । झूझ रह...
Friday, 3 February 2012
मन!!!!!
›
मन से बड़ा न शत्रु कोई ,मन से बड़ा न मीत | मन जग अँधियारा करे , मन ही जलाये दीप || मन परिवर्तन शील है , मन के भेद अपार | मन को वश ...
‹
Home
View web version